एम एस स्वामीनाथन का जीवन परिचय | M.S. Swaminathan Biography In Hindi

एम एस स्वामीनाथन का जीवन परिचय, जीवनी, जन्म, शिक्षा, परिवार, शादी, पत्नी, बच्चे, करियर, उम्र, सफलता की कहानी, हरित क्रांति के जनक, कुल संपत्ति, शोध केंद्र के संस्थापक, निधन, वर्तमान में चर्चा का कारण ( M.S. Swaminathan Biography In Hindi, Wiki, Birth, Education, Family, Marriage, Wife, Children, Career, Age, Success Story, Father of Green Revolution, Net Worth, Founder of Research Center, Death, Current Reason For Fame )

मनकोंबू संबासिवन स्वामीनाथन एक भारतीय कृषि विज्ञानी, कृषि वैज्ञानिक, पादप अनुवंशिकीविद् , प्रशासक और मानवतावादी थे। वे विश्व स्तर पर हरित क्रांति के नेता थे और भारत में इसके जनक। चावल और गेहूं की उच्च पैदावार देने वाली किस्म को निर्मित कर भारत में भुखमरी को दूर करते हुए कृषि को एक नई दिशा दी जिसके लिए उन्हें भारत की हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।

उन्होंने अपने जीवन में विज्ञान तथा तकनीकी के क्षेत्र में जो योगदान दिया है वह अविश्वसनीय है। उन्होंने ऐसे-ऐसे कार्यों को करके दिखाया है जिन कार्यों को विश्व भर के कृषि वैज्ञानिक नहीं कर पाए। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से उनके जन्म से लेकर वर्तमान जीवन तक का संपूर्ण वर्णन करने वाले हैं इसलिए आप अंत तक बन रहे, तो चलिए शुरू करते हैं हरित क्रांति के जनक एम एस स्वामीनाथन का जीवन परिचय (M.S. Swaminathan Biography In Hindi ) के बारे में –

Table of Contents

एम एस स्वामीनाथन कौन है ( Who Is M.S. Swaminathan )

एम एस स्वामीनाथन भारत के एक कृषि वैज्ञानिक हैं। जिन्होंने भारत को कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वह भारत के कृषि वैज्ञानिक, पादप अनुवांशिकीविद् और मानवतावादी थे। भारत में हरित क्रांति की शुरुआत उन्होंने ही की थी इसी कारण से उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता हैं। इसके अलावा भी उन्होंने कृषि के लिए काफी कार्य किए थे, उन कार्यों के कारण ही भारत कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सका।

एम एस स्वामीनाथन का जीवन परिचय ( M.S. Swaminathan Biography In Hindi )

नाम ( Name )मनकोंबु संबासिवन स्वामीनाथन
उपनाम ( Nick Name )एम एस स्वामीनाथन
जन्म तारीख ( Birth Date )7 अगस्त 1925
समापन/मृत्यु तारीख ( Death Date )28 सितंबर 2023
जन्म स्थान ( Birth Place )कुंभकोणम ( तमिलनाडु )
पेशा ( Profession )आनुवांशिकी विज्ञानी/कृषि वैज्ञानिक
नागरिकता ( Nationality )भारतीय
गृहनगर ( Hometown )चेन्नई ( केरल )
शैक्षणिक योग्यता ( Educational Qualification )कृषि में स्नातक
स्कूल ( School )कैथोलिक लिटिल फ्लावर हाई स्कूल – कुंभकोणम ( तमिलनाडु )
कॉलेज ( College )कोयंबटूर कृषि कॉलेज, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
धर्म ( Religion )हिंदू
उम्र ( Age )98 वर्ष ( 2023 के अनुसार )
लंबाई ( Height )5 फीट 9 इंच
वजन ( Weight )70 किलो
बालों का रंग ( Hair Colour )काला, सफेद
आंखो का रंग ( Eyes Colour )काला
राशि ( Zodiac )सिंह
वैवाहिक स्थिति ( Merital Status )विवाहित
कुल संपत्ति ( Net Worth )64 करोड़

एफ एस स्वामीनाथ का जन्म एवं प्रारंभिक जीवन ( M.S. Swaminathan Birth and Starting Life )

एम एस स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था। स्वामीनाथन बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में आगे रहे हैं उन्हें पढ़ाई लिखाई का भी काफी शौक था। परंतु वह कृषि क्षेत्र से ना जुड़कर किसी अन्य क्षेत्र से जुड़ना चाहते थे लेकिन उस वक्त भारत की स्थिति कृषि के क्षेत्र में बहुत ही खराब थी जिसे देखते हुए उन्होंने कृषि की ओर अपना रुख किया जिसके लिए एग्रीकल्चर में शिक्षा ग्रहण की।

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इसके बाद उन्होंने भारत में कृषि की पैदावार को बढ़ाने के लिए गेहूं और चावल के उच्च किसके बीजों का निर्माण किया और इन बीजों से काफी पैदावार भी हुई। इसी तरह से न जाने उन्होंने कितने योगदान कृषि क्षेत्र के लिए किए हैं, इसी कारण से वह भारत की हरित क्रांति के जनक भी कहलाए।

एम एस स्वामीनाथन की शिक्षा ( M.S. Swaminathan Education )

जब स्वामीनाथन छोटे थे तभी ही उनके पिता का देहांत हो गया था उसके बाद उनकी देखभाल का कार्य उनके चाचा ने ही किया था। स्वामीनाथन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कुंभकोणम के कैथोलिक लिटिल फ्लावर स्कूल से की और मात्र 15 साल की उम्र में मैट्रिक पास कर लिया। वर्ष 1940 में स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने के लिए केरल के महाराजा कॉलेज में प्रवेश लिया और वहां से इन्होंने जूलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने कृषि की खराब स्थिति को देखते हुए एग्रीकल्चर में अपना रुख किया। एग्रीकल्चर के क्षेत्र में अपने आप को आगे बढ़ाने के लिए इन्होंने मद्रास के एग्रीकल्चर कॉलेज में दाखिला लिया और वहा से इन्होंने बीएससी में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया, जिसके बाद इन्हें बैचलर ऑफ़ साइंस की उपाधि मिली।

फिर 1949 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से जेनेटिक्स में एसोसिएटशिप की डिग्री प्राप्त की तथा 1952 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अनुवांशिकी में पीएचडी की। ये सब करने के बाद भी इन्होंने अपने स्तर पर काफी अध्यन किया और कृषि क्षेत्र में काफी योगदान दिया।

एम एस स्वामीनाथन का परिवार ( M.S. Swaminathan Family )

पिता का नाम ( Father’s Name )डॉ. एमके सांबासिवन
माता का नाम ( Mother’s Name )पार्वती थंगम्मल सांबासिवन
भाई का नाम ( Brother’s Name )ज्ञात नहीं
बहिन का नाम ( Sister’s Name )ज्ञात नहीं
पत्नी का नाम ( Wife’s Name )मीरा स्वामीनाथन
बेटे का नाम ( Son’s Name )नित्या स्वामीनाथन
बेटी का नाम ( Daughter’s Name )सौम्या स्वामीनाथन, मधुरा स्वामीनाथन

एम एस स्वामीनाथ का करियर ( M.S. Swaminathan Career )

शिक्षा ग्रहण करने के बाद स्वामीनाथन रिसर्च में लग गए कि किस तरह से हैं कृषि में पैदावार को बढ़ाया जा सके। स्वामीनाथन ने अंतरराष्ट्रीय संस्थान में जापानी और भारतीय किस्म पर शोध किया।

1954 से 1972 तक स्वामीनाथन ने कटक तथा पूसा स्थित प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों में अद्वितिय कार्य किया। साथ ही साथ प्रशासनिक दायित्व को भी बखूबी निभाया जिसके लिए 1963 में हेग में हुई अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष भी बनाए गए।

भारत एक कृषि प्रधान देश है परंतु 1964 से 70 के दौर में काफी कम पैदावार होने के कारण भारत में अन्न का उत्पादन बहुत ही कम हो रहा था। जिसके कारण यहां भुखमरी की हालत होने लगी थी क्योंकि जिस हिसाब से जनसंख्या थी उसके अनुसार उपज नही हो रही थी।

1966 में जेनेटिक्स वैज्ञानिक स्वामीनाथ ने भारत के बीजो को विदेशी बीजो की किस्म के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकसित किए। स्वामीनाथन का ये प्रयास सफल रहा और पहले ही वर्ष देशभर में काफी पैदावार हुई।

1969 में डॉ. स्वामीनाथन इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के सचिव बनाए गए साथ वे इसके फेलो मेंबर भी बने।

1972 में भारत सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिषद का महानिदेशक नियुक्त किया। साथ ही उन्हें भारत सरकार में सचिव भी नियुक्त किया।

1979 से 1980 तक वे मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर फ़ॉर्म के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी बने। 1982 से 88 तक उन्होंने जनरल डायरेक्टर के पद पर रहते हुए इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट की सेवा भी की।

इसके साथ ही उन्होंने विदेशी और भारत के बीजो की किस्मों के मिश्रण को भी जारी रखा। इस बार उन्होंने पिछली बार से भी ज्यादा उन्नत किस्म के बीज की उपज करके अन्न के उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया और देश में हरित क्रांति लेकर आए। जिससे देश में सभी जगह से अन्न की समस्या खत्म हो गई।

1988 मैं इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ़ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज के प्रेसिडेंट भी बने। 1999 में टाइम पत्रिका ने उन्हें 20वीं सदी के 200 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया।

एम एस स्वामीनाथन हरित क्रांति के जनक/अगुआ ( M. S. Swaminathan Father of Green Revolution )

भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की अधिकांश जनता गावों में रहने के कारण कृषि से जुड़ी हुई है। इसके बावजूद भी भारत की जनता काफी वर्षों तक भुखमरी का शिकार होती रही, यहां तक की अन्न की पैदावार करने वाले किसान भी इस समस्या से जूझ रहे थे। इसका कारण कुछ भी हो परंतु पूरे विश्व में भारत के लिए इस तरह का नजरिया बन गया था कि भारत एक कृषि प्रधान देश होते हुए भी भुखमरी की इस स्थिति को झेल रहा है।

इसका मूल कारण यह था की भारत में इस समय तक भी वही पुराने तरीकों से कृषि करना एवं उन्हीं बीजो का प्रयोग करना जो काफी लंबे समय से चले आ रहे थे। वह अब वर्तमान समय के हिसाब से भूमि के लिए उपयोगी नहीं थे इसी कारण से पैदावार भी कम हो रही थी।

इतनी कठिनाइयों के बावजूद किसी भी व्यक्ति का ध्यान इस स्थिति की ओर नहीं गया। एकमात्र व्यक्ति एम एस स्वामीनाथन ही थे जिन्होंने इस स्थिति को समझा और उसकी तरफ ध्यान देना शुरू किया। देखते ही देखते कुछ ही समय में उन्होंने विदेशी बीजों को भारत की किस्म के बीजों के साथ मिश्रित करके एक उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की किस्म तैयार की जिसकी वजह से भारत में एक बार फिर से अन्न की भरपूर पैदावार होने लगी। भारत कृषि के क्षेत्र में एक बार फिर आत्मनिर्भर बना और इसीलिए एम एस स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक/अगुआ कहा जाता है।

एम एस स्वामीनाथन द्वारा शोध केंद्र की स्थापना ( Establishment of Research Center by M.S. Swaminathan )

विभिन्न पुरस्कारों और सम्मानों के साथ प्राप्त राशि से एम एस स्वामीनाथन ने वर्ष 1990 के दशक के आरंभिक वर्षों में अवलंबनीय कृषि तथा ग्रामीण विकास के लिए चेन्नई में एक शोध केंद्र की स्थापना की।

एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाऊंडेशन का मुख्य उद्देश्य भारतीय गांवो में प्रकृति तथा महिलाओं के अनुकूल प्रौद्योगिकी के विकास और प्रसार पर आधारित रोजगार उपलब्ध कराने वाली आर्थिक विकास की रणनीति को बढ़ावा देना और साथ ही इस फाउंडेशन के माध्यम से नये कृषि वैज्ञानिक भी तैयार किए जा सके जो पैसे के कारण आगे नही बढ़ पाते।

एम एस स्वामीनाथन की उपलब्धियां/पुरस्कार ( M.S. Swaminathan Achievements/Award )

क्रम संख्यावर्षपुरस्कार का नाम
11967पद्म श्री
21971रेमन मैग्सेस पुरस्कार
31972पद्म भूषण
41987विश्व खाद्य पुरस्कार
51989पद्म विभूषण

एम एस स्वामीनाथन की पसंद और नापसंद ( M.S. Swaminathan Like and Dislike )

पसंदीदा खानाराजमा-चावल
पसंदीदा अभिनेताचार्ली चैपलिन, अमिताभ बच्चन
पसंदीदा अभिनेत्रीनलिनी जयवंत
पसंदीदा खेलहॉकी
पसंदीदा खिलाड़ीमेजर ध्यानचंद
पसंदीदा जगहजम्मू-कश्मीर, न्यूजीलैंड
पसंदीदा रंगहरा
नापसंदऑयली फूड

एम एस स्वामीनाथन की कुल संपत्ति ( M.S. Swaminathan Net Worth )

कुल संपत्ति ( Net Worth )8 मिलियन डॉलर
कुल संपत्ति भारतीय रूपयो में ( Net Worth In Indian Rupees )64 करोड़
वार्षिक आय ( Yearly Income )50 लाख
मासिक आय ( Monthly Income )4 लाख+
आय स्रोत ( Income Source )राजनेता के रूप में सैलरी, भत्ते, वैज्ञानिक के रूप में सैलरी

एम एस स्वामीनाथन की मृत्यु ( M.S. Swaminathan Death )

भारत के महान कृषि वैज्ञानिक “हरित क्रांति” के जनक कहे जाने वाले एम एस स्वामीनाथन वर्तमान में अपनी मृत्यु के कारण चर्चा में बने हुए हैं। स्वामीनाथन वह महापुरुष है जिन्होंने भारत को कृषि के क्षेत्र में उन्नति दिलाई और आत्मनिर्भर बनाया। वे काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और अपनी बीमारी के कारण ही उन्होंने 28 सितंबर 2023 को अंतिम सांस ली। वे 98 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके थे और आगे भी देश के महान कृषि वैज्ञानिक देश के लिए बहुत कुछ कर सकते थे पर उनकी बीमारियो ने उन्हें इस दुनिया से अलविदा कर दिया।

एम एस स्वामीनाथ के सोशल मीडिया अकाउंट्स ( M.S. Swaminathan Social Media Account )

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एम एस स्वामीनाथन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण रोचक तथ्य –

  • 1999 में टाइम पत्रिका ने उन्हें 20वी सदी के 200 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया।
  • उन्हें कृषि के क्षेत्र में बेतरीन योगदान के लिए पद्म श्री, पद्म भूषण तथा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
  • वह 2007 से 2013 तक राज्य सदन में मनोनित संसद सदस्य भी रहे।
  • भारत में हरित क्रांति के जनक/अगुआ भी कहा जाता हैं क्योंकि उन्नत किस्म के बीज तैयार करके कृषि पैदावार में वृद्धि की थी।
  • उन्होंने गेहूं, चावल और आलू की किस्मों पर अपने प्रयोग किए थे।

FAQ

Q : एम एस स्वामीनाथन का जन्म कब और कहां हुआ था ?

Ans : एम एस स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को कुंभकोणम ( तमिलनाडु ) में हुआ था।

Q : एम एस स्वामीनाथन की उम्र कितनी है ?

Ans : एम एस स्वामीनाथन की उम्र 98 वर्ष ( 2023 के अनुसार ) है।

Q : एम एस स्वामीनाथन की पत्नी का क्या नाम है ?

Ans : एम एस स्वामीनाथन की पत्नी का नाम मीना स्वामीनाथन है।

Q : एम एस स्वामीनाथन ने शोध केंद्र की स्थापना कब की थी ?

Ans : एम एस स्वामीनाथन ने शोध केंद्र की स्थापना वर्ष 1990 में की थी।

Q : एम एस स्वामीनाथन ने हरित क्रांति की शुरुआत कब की थी ?

Ans : एम एस स्वामीनाथन ने हरित क्रांति की शुरुआत वर्ष 1965 – 1968 में की थी।

Q : एम एस स्वामीनाथन कौन है ?

Ans : एम एस स्वामीनाथन आनुवांशिकी विज्ञानी थे जिन्हें भारत की हरित क्रांति का जनक माना जाता है।

Q : एम एस स्वामीनाथन का निधन कब हुआ ?

Ans : एम एस स्वामीनाथन का निधन 28 सितंबर 2023 को हुआ।

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निष्कर्ष :-

मैं उम्मीद करता हूं कि आपको “एम एस स्वामीनाथन का जीवन परिचय | M.S. Swaminathan Biography In Hindi” पसंद आया होगा। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा कमेंट करके हमें अपनी राय दें और यह भी बताएं कि आपको इस जीवनी से क्या सीखने को मिला साथ ही इसे अपने सोशल मीडिया और दोस्तों में भी शेयर करें।

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